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Books > Hindi > हिंदू धर्म > ब्रह्मसूत्र > योगसूत्र: Yoga Sutras in the Light of Sage Vyasa and Rajneesh
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योगसूत्र: Yoga Sutras in the Light of Sage Vyasa and Rajneesh
Pages from the book
योगसूत्र: Yoga Sutras in the Light of Sage Vyasa and Rajneesh
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Description




विषय सूचि

 

वृत्ति के प्रकार 13
चित्तवृत्ति निरोध के उपाय 36
वैराग्य (ऊपर वैराग्य) 43
सम्प्रज्ञात समाधी 56
असम्प्रज्ञात समाधी 80
ईश्वर का स्वरुप 102
प्रणव जप से लाभ 122
चित्त को निर्मल करने की विधि 134
चित्त को स्थिर करने का विशोक ज्योतिष्मती उपाय 164
समपत्ति (समाधी) 167
सूक्ष्मविषय की सीमा 170
सबीज समाधियां 171
निर्विचार समाधी की परनाती अध्यात्मप्रसाद में 172
ऋतमभरा प्रज्ञा 181
निर्बीज समाधी 184
क्रियायोग 191
क्लेश 219
कर्माशय 224
क्लेशों के कारन कर्मविपाक 256
गुणों का स्वभाव, स्वरुप एवं प्रयोजन 271
दृष्टा का स्वरुप 276
दृश्य की उपयोगिता 279
सयोंग का स्वरुप 288
अविद्या 294
योगांकों के अनुष्ठान का लाभ . 298
नियम 324
आसान 367
प्राणायाम 384
प्रत्याहार 394
धरना 395
ध्यान 403
समाधी 406
सयम 408
निरोधपरिणाम 426
एकाग्रता परिणाम 432
धर्म, लक्षण और अवस्था परिणाम 436
धर्मी का लक्षण 437
कर्मभेद से परिणामभेद 446
अतीत और अनागत ज्ञान की सिद्धि 450
समस्त प्राणियों की भाषा का ज्ञान 459
पूर्वजन्मों के ज्ञान की सिद्धि 462
परपुरुष की चित्तवृत्ति का ज्ञान 463
अंतधारणसिद्धि 464
मृत्यु के समय का ज्ञान 476
मैत्री आदि बालों की सिद्धि 478
हस्ती आदि के बलों की सिद्धि 479
सूक्ष्म, व्यवहित और दूरस्थ वस्तुओं का ज्ञान 481
लोक लोकान्तरों के ज्ञान की सिद्धि 482
तारागण की स्थिति का ज्ञान 483
तरगं की गति का ज्ञान 484
शरीर की संरचना का ज्ञान 485
क्षुतपि पास निवृत्ति का सिद्धि 486
स्थिरता की सिद्धि 492
सर्वग्यसिद्धि 497
चित्त का ज्ञान 500
स्वार्थ पर सयम करने से पुरुषज्ञान 500
सिद्धियों की उपयोगिता 503
परकाया प्रवेश 504
उदानप्राण के जय का फल 509
समानप्राण के जय का फल 509
श्रोत्र और आकाश के सयम का फल 520
आकाशगमन सिद्धि 520
महाविदेह विभूति 525
इंद्रियसिद्धि 527
सर्वाधिष्ठातृत्य और सर्ज्ञता 528
योगी के लिए आसक्ति और अभिमान अनिष्टकारक 528
क्षण और क्रम पर सयम करने से विवेकजी ज्ञान की प्राप्ति 534
कैवल्य का स्वरुप 560
सिद्धियों के प्रकार 542
अनेक निर्मित चित्त अस्मितारूप 617
दृष्टा और दृश्य के साक्षत्कार का लाभ आत्मभाव की निवृत्ति 621
धर्ममेघ समाधी 637
परिणामक्रम का लक्ष्मण 652
कैवल्य का स्वरुप 656
अकारादिक्रम विषयानुक्रमणिका 656















योगसूत्र: Yoga Sutras in the Light of Sage Vyasa and Rajneesh

Item Code:
NZK775
Cover:
Hardcover
Edition:
2016
ISBN:
9788171105502
Language:
Sanskrit Text with Hindi Translation
Size:
9.5 inch X 7.5 inch
Pages:
707
Other Details:
Weight of the Book: 1.3 kg
Price:
$36.00   Shipping Free
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विषय सूचि

 

वृत्ति के प्रकार 13
चित्तवृत्ति निरोध के उपाय 36
वैराग्य (ऊपर वैराग्य) 43
सम्प्रज्ञात समाधी 56
असम्प्रज्ञात समाधी 80
ईश्वर का स्वरुप 102
प्रणव जप से लाभ 122
चित्त को निर्मल करने की विधि 134
चित्त को स्थिर करने का विशोक ज्योतिष्मती उपाय 164
समपत्ति (समाधी) 167
सूक्ष्मविषय की सीमा 170
सबीज समाधियां 171
निर्विचार समाधी की परनाती अध्यात्मप्रसाद में 172
ऋतमभरा प्रज्ञा 181
निर्बीज समाधी 184
क्रियायोग 191
क्लेश 219
कर्माशय 224
क्लेशों के कारन कर्मविपाक 256
गुणों का स्वभाव, स्वरुप एवं प्रयोजन 271
दृष्टा का स्वरुप 276
दृश्य की उपयोगिता 279
सयोंग का स्वरुप 288
अविद्या 294
योगांकों के अनुष्ठान का लाभ . 298
नियम 324
आसान 367
प्राणायाम 384
प्रत्याहार 394
धरना 395
ध्यान 403
समाधी 406
सयम 408
निरोधपरिणाम 426
एकाग्रता परिणाम 432
धर्म, लक्षण और अवस्था परिणाम 436
धर्मी का लक्षण 437
कर्मभेद से परिणामभेद 446
अतीत और अनागत ज्ञान की सिद्धि 450
समस्त प्राणियों की भाषा का ज्ञान 459
पूर्वजन्मों के ज्ञान की सिद्धि 462
परपुरुष की चित्तवृत्ति का ज्ञान 463
अंतधारणसिद्धि 464
मृत्यु के समय का ज्ञान 476
मैत्री आदि बालों की सिद्धि 478
हस्ती आदि के बलों की सिद्धि 479
सूक्ष्म, व्यवहित और दूरस्थ वस्तुओं का ज्ञान 481
लोक लोकान्तरों के ज्ञान की सिद्धि 482
तारागण की स्थिति का ज्ञान 483
तरगं की गति का ज्ञान 484
शरीर की संरचना का ज्ञान 485
क्षुतपि पास निवृत्ति का सिद्धि 486
स्थिरता की सिद्धि 492
सर्वग्यसिद्धि 497
चित्त का ज्ञान 500
स्वार्थ पर सयम करने से पुरुषज्ञान 500
सिद्धियों की उपयोगिता 503
परकाया प्रवेश 504
उदानप्राण के जय का फल 509
समानप्राण के जय का फल 509
श्रोत्र और आकाश के सयम का फल 520
आकाशगमन सिद्धि 520
महाविदेह विभूति 525
इंद्रियसिद्धि 527
सर्वाधिष्ठातृत्य और सर्ज्ञता 528
योगी के लिए आसक्ति और अभिमान अनिष्टकारक 528
क्षण और क्रम पर सयम करने से विवेकजी ज्ञान की प्राप्ति 534
कैवल्य का स्वरुप 560
सिद्धियों के प्रकार 542
अनेक निर्मित चित्त अस्मितारूप 617
दृष्टा और दृश्य के साक्षत्कार का लाभ आत्मभाव की निवृत्ति 621
धर्ममेघ समाधी 637
परिणामक्रम का लक्ष्मण 652
कैवल्य का स्वरुप 656
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