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जिज्ञासु रचना मञ्जरी: Works of Brahmadatt Jijnasu (Set of 2 Volumes)

जिज्ञासु रचना मञ्जरी: Works of Brahmadatt Jijnasu (Set of 2 Volumes)
$43.00
Item Code: NZE661
Author: युधिष्ठर मीमांसक (Yudhishthir Mimansak) (Editor)
Publisher: Ram Lal Kapoor Trust
Language: Hindi
Edition: 1993
ISBN:
Pages: 1089
Cover: Hardcover
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
Part I






विषय सूची (भाग - )

श्री पं. ब्रह्मदत्त जी जिज्ञासु का स्वलिखित जीवन परिचय

1-9

वेद वेदार्थ विवेचन

11-388

यजुर्वेदभाष्य विवरण की भूमिका

13-249

वेद और निरुक्त

250-297

निरुक्तकार और वेद में इतिहास

298-338

देवापि और शन्तनु के वैदिक आख्यान का वास्तविक स्वरुप

339-388

उपोद्घात भूमिकाएँ

386-465

उपोद घातः (काशिका)

391-410

प्रथमवृति भूमिका

411-434

प्रथमवृति प्राक्कथन

435-447

सरलतमविधि भूमिका

448-457

आर्याभिविनय भूमिका

458-461

सन्ध्योपासनविधि

462-465

विषय सूची (भाग -)

वेद सम्मेलनों में अध्यक्षीय भाषण

3-108

वेद सम्मेलन, लाहौर

3-32

आर्य विद्वत सम्मेलन, कलकत्ता

33-45

वेद सम्मेलन, खुरजा

46-76

वेद सम्मेलन, मेरठ

77-108

वेदवाणी में निबन्ध

111-460

सायणाचार्य का वेदार्थ

111-118

महर्षि दयानन्द के भाष्य की विशेषतायें

119-123

वेदों का प्रादुर्भाव

124-127

ऋषिदयानन्द कृत वेदभाष्य के सम्बन्ध में मेरी धारणा

128-156

ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यजुर्वेद भाष्य विवरण और परोपकारिणी सभा

157-172

भारत की अपूर्व सम्पति वेद

173-180

वेदार्थ का महान पुनरुद्वारक ऋषि दयानन्द

181-212

वेदमन्त्रों का विनियोग

213-241

सायणा का वेदार्थ

242-253

वेदार्थ प्रक्रिया के मुलभुत सिद्धान्त

254-288

रिसर्च (खोज) विषय में पाश्चात्यों की गहरी भूलें, वैबर और कैलेएड की प्रमाणिकता का परिक्षण

289-321

निरुक्तविषय में पाश्चात्त्य मत की मौलिक भूल वा अनधिकार चेष्टा

322-263

यास्क और देवतावाद

364-371

वेद का स्वरुप, एक आवश्यक  और गम्भीर विचारणीय विषय

372-390

वेद का अनुसन्धान

391-399

वेदार्थ की मूल भित्ति

400-403

भारत के समस्त रोगों की अचूक अौषध, ऋषिप्रणाली

404-455

संस्कृत का प्रसार तथा व्यापक ज्ञान कैसे हो ?

456-459

वेदवाणी में अग्रलेख

463-608

वेद और ईश्वर का सम्बन्ध

463-465

संस्कारविधि पर किये गए आक्षेपों के सम्बन्ध में मेरा व्यक्तव्य

466-475

मेरा सम्पादकत्व

476-477

महाऋषि दयानन्द कृत वेदभाष्य की स्थिति

478-482

वेद और उसकी शाखायें

483-488

वेदों के छंद

489-490

मेरा निवेदन 

491-492

संस्कारविधि के विवाहप्रकरणस्थ मन्त्र पर विचार

493-498

वेद में इतिहास

499-502

वेद का प्रादुर्भाव

503-507

ऋषियों ने सीधा सरल वेदार्थ या वेदभाष्य क्यों नही किया ?

508-511

वैदिक छांदोवद

512-515

माननीय टंडन जी की विजय

516-519

हा श्री. पं. महेशप्रसाद जी

520-521

आर्यासम्मेलन मेरठ

522-548

आर्य महासम्मेलन का सिंहावलोकन

549-575

अज्ञानी भारत

576-580

वेदवाणी का सप्तम वर्ष

581-589

पाश्चात्य मत परीक्षणक का उपक्रम

590-599

काश्मीर समस्या की आड़ में अमेरिका और ब्रिटेन का भारत के विरुद्ध षड्यन्त्र

597-599

भारत के शत्रु इंग्लैंड और अमेरिका नंगे हो गए

600-601

न्याय की नीति हो सच्ची नीति

602-606

वेद का सामयिक आदेश

607-608

अन्यत्र प्रकाशित लेख निबन्ध

611-620

वेदार्थ पुनरुद्वारक ऋषि दयानन्द    

611-620

 

Sample Pages (Volume I)



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