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संतों की लीला: The Profermance of Saints

भूमिका

साधारण मानव को ईश्वर से जोड़ने वाली कड़ी है । वे संत जो हर युग मे जन्म लेते हैं, और संपूर्ण मानवता को एक नया विचार, एक नई दिशा देते हैं । आदिम युग से आज तक अगर ये संत न होते तो हमारी मानव जाति का अस्तित्व ही शेष न रहता। मनुष्य स्वभाव से ही महत्वाकांक्षी और शोषण करने वाला है सत्ता की पूरव इसे दीवाना बना देती है । इतिहास गवाह है रावण, कंस, अशोक जैसे न जाने कितने सत्तलोलुपों ने इस पृथ्वी पर रक्तपात किया है, महाभारत और दो-दो विश्वयुद्ध यह पृथ्वी झेल चुकी है। अगर ईसा, राम, कृष्ण, गौतम, महावीर, कबीर, रामकृष्ण, मोहम्मद मीरा जैसे संत इस पृथ्वी पर अवतरित न होते तो आज चारों तरफ खून की नदियाँ और आस्थिपंजरों के पर्वत होते।

संतों ने ही इंसान को सत्ता की क्षणभंगुरता से आत्मा की शाशवत अमरता की राह बताई है। दादा जे० पी० वासवानी जी ने ऐसे ही कुछ संतों के अमर सदेशों को आप तक पहुचाया है, कृपया इन्हें अपने अंतर की गहराईयों मे अंकित करें, और अपना जीवन सार्थक करें । जिसकी मिसाल आज दादा जे० पी० वासवानीजी स्वयं हैं । एक संत, जिसका धर्म है परोपकार, प्रेम और सेवा। निष्काम निष्कलंक, निर्मल जीवन और सदा मुस्काराता विनम्र चेहरा जैसे कोई देवदूत ईश्वर का संदेश दे रहा है।

 

विषय सूची

भूमिका

5

1

सूरदास

9

2

संत वेमना

43

3

परमहंस योगानंदा

54

4

केशवचंद्र सेन

66

5

संत रामकृष्ण

75

6

स्वामी विवेकानंद

90

7

रविंद्रनाथ टैगोर

105

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