Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Buddhist > Buddha > महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of Gautam Buddha
Subscribe to our newsletter and discounts
महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of Gautam Buddha
Pages from the book
महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of Gautam Buddha
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के बारे में

महाभिषग शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित उपन्यास है न कि भगवान बुद्ध के । बुद्ध को भगवान बनानेवाले उस महान उद्देश्य से ही विचलित हो गए थे, जिसे लेकर बुद्ध ने अपना महान सामाजिक प्रयोग किया था और यह संदेश दिया था कि जाति या जन्म के कारण कोई किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है और कोई भी व्यक्ति यदि संकल्प कर ले और जीवन-मरण का प्रश्न बनाकर इस बात पर जुट जाए तो वह भी बुद्ध हो सकता है ।

महाभिषग इस क्रांतिकारी द्रष्टा के ऊपर पड़े देववादी खोल को उतारकर उनके मानवीय चरित्र को हो सामने नहीं लाता, यह देववाद के महान गायक अश्वघोष को भी एक पात्र बनाकर सिर के बल खड़ा करने का और देववाद की सीमाओं को उजागर करने का प्रयत्न करता है ।

इतिहास की मार्मिक व्याख्या वर्तमान पर कितनी सार्थक टिप्पणी बन सकती है, इस दृष्टि से भी यह एक नया प्रयोग है ।

लेखक के बारे में

भगवान सिंह का जन्म, 1 जुलाई 1931, गोरखपुर जनपद के एक मध्यवित्त किसान परिवार में। गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम. . ( हिंदी) । आरंभिक लेखन सर्जनात्मक कविता, कहानी, उपन्यास और आलोचना । 1968 में भारत की सभी भाषाओं को सीखने के क्रम में भाषाविज्ञान और इतिहास की प्रचलित मान्यताओं से अनमेल सामग्री का प्रभावशाली मात्रा में पता चलने पर इसकी छानबीन के लिए स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन, अंशत : प्रकाशित, नागरीप्रचारिणी पत्रिका, (1973); पुन : इसकी गहरी पड़ताल के लिए शोध का परिणाम आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता लिपि प्रकाशन, नई दिल्ली, (1973) । इसके बाद मुख्य रुचि भाषा और इतिहास के क्षेत्र में अनुसंधान में और सर्जनात्मक लेखन प्रासंगिक हो गया । इसके बाद के शोधग्रथों में. हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, दो खंडों में, (1987) राधाकृष्ण प्रकाशन) दरियागंज, नई दिल्ली; दि वेदिक हड़प्पन्स, (1995), आदित्य प्रकाशन, एफ 14/65, मॉडल टाउन द्वितीय, दिल्ली - 110009, भारत तब से अब तक (1996) शब्दकार प्रकाशन, अंगद नगर, दिल्ली-92) ( संप्रति) किताबघर प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली; भारतीय सभ्यता की निर्मिति (2004) इतिहासबोध प्रकाशन, इलाहाबाद; प्राचीन भारत के इतिहासकार, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली, (2011), भारतीय परंपरा की खोज, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली, ( 2011), कोसंबी : कल्पना से यथार्थ तक, आर्यन बुक्स इंटरनेशनल, नई दिल्ली, (2011); आर्य-द्रविड़ भाषाओं का अंत : संबंध, सस्ता साहित्य मण्डल (2013); भाषा और इतिहास, (प्रकाश्य) । संप्रति ऋग्वेद का सांस्कृतिक दाय पर काम कर रहे हैं ।

प्रकाशकीय

मेरे गुरुवर पालि साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ. भरत सिंह उपाध्याय आज जीवित होते तो 'महाभिषग' उपन्यास को पढ़कर इसका नया पाठ-विमर्श करते और चित्त से खिल गए होते । वे नहीं हैं पर आप तो हैं । इस उपन्यास का सांस्कृतिक परिवेश न केवल मोहक है बल्कि आँखें खोलनेवाला है । 'महाभिषग' उपन्यास की सांस्कृतिक संवेदना का बोध आपको उस समय समाज-संस्कृति-इतिहास की गूँजों-अनुगूँजों से साक्षात्कार कराएगा । संस्कृति, समाज, युग परिवेश पर संस्कृति चिंतक कथाकार भगवान सिंह जी की मजबूत पकड़ रही है । वे अतीत से वर्तमान का संवाद कराने में सक्षम कथाकार हैं । अतीत की वर्तमानता निरंतरता का बोध उनकी कृति कला का अंग रहा है । अश्वघोष हों या आचार्य पुण्ययश, सभी की भाषा संवेदना में युग की मोहक ध्वनियाँ हैं । कहना होगा कि इस उपन्यास की अंतर्यात्रा का अपना बौद्धिक .सुख है । यह सुख बौद्ध-धर्म-दर्शन के दो घूँट पा जाने से कम नहीं हैं ।

मैं भगवान सिंह जी के इस उपन्यास को पाठक समाज को सौंपते हुए अपार हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ । मुझे विश्वास है कि हिंदी के प्रबुद्ध समाज में इस उपन्यास का स्वागत होगा ।

दो शब्द

सज्जनो, स्वयं गिनकर देखिए-क्या ये दो ही शब्द हैं? देश का दुर्भाग्य है कि जिन्हें गिनती तक नहीं आती वे साहित्य लिखने बैठ जाते हैं । और प्राय: गणित के शलाकाधारियों को भी इनकी लिखी चीजें पढ़नी पड़ जाती हैं । दोष मेरा नहीं है । मैं तो केवल परंपरा का निर्वाह कर रहा हूँ। अपने प्रेमचंद तो यह साबित करने के लिए कि वह अच्छे लेखक बन सकते हैं गणित में फेल हो ही गए थे । मेरे साथ, अलबत्ता, एक नई परंपरा आरंभ हो रही है । पाठकों के साथ धोखाधड़ी जरूर करो, पर लेखकीय ईमानदारी के तकाजे से उन्हें यह भी बता दो कि आपके साथ धोखा हुआ है ।

यह उपन्यास आज से दो दशक पहले लिखा और पीने दो दशक पहले छपा गया था, पर प्रकाशित नहीं हो पाया था । कारण यह नहीं था कि उस समय तक हिंदुस्तान में बिजली नहीं आ पाई थी, (समस्या इतनी सरल होती तो दीये या मशाल में काम चला लिया गया होता) बल्कि यह कि एक मेमने को शेर की तरह छलाँग लगाकर पाठकों पर टूट पड़ने को ललकारा गया था और मेमना बेचारा खुद ही आँखें मूँदकर प्रकाश से जी चुरा रहा था । प्रकाशन के विषय में स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत का ज्ञान और अनुभव कविगुरु मैथिलीशरण गुप्त के काव्य-संसार से जुड़ा हुआ था जिनकी कृतियाँ कवि- कल्पना में आने से पहले ही पाठ्यपुस्तकों में लग जाती थीं और पुस्तक विक्रेताओं के पास भी पहले पैसा फिर किताबवाले न्याय से पहुँचती थीं । इसका प्रभाव पुस्तक के वितरण पर पड़ा । राधाकृष्ण प्रकाशन ने इसे प्रकाशित तो किया परंतु रहस्यमय कारणों से वे इसका महत्त्व नहीं समझ सके । फिर मुझे उनसे इसका प्रकाशनाधिकार सस्ता साहित्य मण्डल को सौंपने की विवशता उत्पन्न हुई । अनेक आलोचकों ने इसे मेरे बहुचर्चित उपन्यास 'अपने-अपने राम' से अधिक अच्छी रचना माना है । उनका आकलन सही है या नहीं इसका पता चलना बाकी है ।

इस गर्मी और खुशी का इजहार इस रूप में भी हुआ है कि इसकी भाषा में अपेक्षित परिवर्तन कर दिए गए हैं ।

Sample Page

महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of Gautam Buddha

Item Code:
NZD057
Cover:
Paperback
Edition:
2014
ISBN:
9788173096358
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
207
Other Details:
Weight of the Book: 235 gms
Price:
$20.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of Gautam Buddha

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 5092 times since 17th Jul, 2019

पुस्तक के बारे में

महाभिषग शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित उपन्यास है न कि भगवान बुद्ध के । बुद्ध को भगवान बनानेवाले उस महान उद्देश्य से ही विचलित हो गए थे, जिसे लेकर बुद्ध ने अपना महान सामाजिक प्रयोग किया था और यह संदेश दिया था कि जाति या जन्म के कारण कोई किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है और कोई भी व्यक्ति यदि संकल्प कर ले और जीवन-मरण का प्रश्न बनाकर इस बात पर जुट जाए तो वह भी बुद्ध हो सकता है ।

महाभिषग इस क्रांतिकारी द्रष्टा के ऊपर पड़े देववादी खोल को उतारकर उनके मानवीय चरित्र को हो सामने नहीं लाता, यह देववाद के महान गायक अश्वघोष को भी एक पात्र बनाकर सिर के बल खड़ा करने का और देववाद की सीमाओं को उजागर करने का प्रयत्न करता है ।

इतिहास की मार्मिक व्याख्या वर्तमान पर कितनी सार्थक टिप्पणी बन सकती है, इस दृष्टि से भी यह एक नया प्रयोग है ।

लेखक के बारे में

भगवान सिंह का जन्म, 1 जुलाई 1931, गोरखपुर जनपद के एक मध्यवित्त किसान परिवार में। गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम. . ( हिंदी) । आरंभिक लेखन सर्जनात्मक कविता, कहानी, उपन्यास और आलोचना । 1968 में भारत की सभी भाषाओं को सीखने के क्रम में भाषाविज्ञान और इतिहास की प्रचलित मान्यताओं से अनमेल सामग्री का प्रभावशाली मात्रा में पता चलने पर इसकी छानबीन के लिए स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन, अंशत : प्रकाशित, नागरीप्रचारिणी पत्रिका, (1973); पुन : इसकी गहरी पड़ताल के लिए शोध का परिणाम आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता लिपि प्रकाशन, नई दिल्ली, (1973) । इसके बाद मुख्य रुचि भाषा और इतिहास के क्षेत्र में अनुसंधान में और सर्जनात्मक लेखन प्रासंगिक हो गया । इसके बाद के शोधग्रथों में. हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, दो खंडों में, (1987) राधाकृष्ण प्रकाशन) दरियागंज, नई दिल्ली; दि वेदिक हड़प्पन्स, (1995), आदित्य प्रकाशन, एफ 14/65, मॉडल टाउन द्वितीय, दिल्ली - 110009, भारत तब से अब तक (1996) शब्दकार प्रकाशन, अंगद नगर, दिल्ली-92) ( संप्रति) किताबघर प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली; भारतीय सभ्यता की निर्मिति (2004) इतिहासबोध प्रकाशन, इलाहाबाद; प्राचीन भारत के इतिहासकार, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली, (2011), भारतीय परंपरा की खोज, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली, ( 2011), कोसंबी : कल्पना से यथार्थ तक, आर्यन बुक्स इंटरनेशनल, नई दिल्ली, (2011); आर्य-द्रविड़ भाषाओं का अंत : संबंध, सस्ता साहित्य मण्डल (2013); भाषा और इतिहास, (प्रकाश्य) । संप्रति ऋग्वेद का सांस्कृतिक दाय पर काम कर रहे हैं ।

प्रकाशकीय

मेरे गुरुवर पालि साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ. भरत सिंह उपाध्याय आज जीवित होते तो 'महाभिषग' उपन्यास को पढ़कर इसका नया पाठ-विमर्श करते और चित्त से खिल गए होते । वे नहीं हैं पर आप तो हैं । इस उपन्यास का सांस्कृतिक परिवेश न केवल मोहक है बल्कि आँखें खोलनेवाला है । 'महाभिषग' उपन्यास की सांस्कृतिक संवेदना का बोध आपको उस समय समाज-संस्कृति-इतिहास की गूँजों-अनुगूँजों से साक्षात्कार कराएगा । संस्कृति, समाज, युग परिवेश पर संस्कृति चिंतक कथाकार भगवान सिंह जी की मजबूत पकड़ रही है । वे अतीत से वर्तमान का संवाद कराने में सक्षम कथाकार हैं । अतीत की वर्तमानता निरंतरता का बोध उनकी कृति कला का अंग रहा है । अश्वघोष हों या आचार्य पुण्ययश, सभी की भाषा संवेदना में युग की मोहक ध्वनियाँ हैं । कहना होगा कि इस उपन्यास की अंतर्यात्रा का अपना बौद्धिक .सुख है । यह सुख बौद्ध-धर्म-दर्शन के दो घूँट पा जाने से कम नहीं हैं ।

मैं भगवान सिंह जी के इस उपन्यास को पाठक समाज को सौंपते हुए अपार हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ । मुझे विश्वास है कि हिंदी के प्रबुद्ध समाज में इस उपन्यास का स्वागत होगा ।

दो शब्द

सज्जनो, स्वयं गिनकर देखिए-क्या ये दो ही शब्द हैं? देश का दुर्भाग्य है कि जिन्हें गिनती तक नहीं आती वे साहित्य लिखने बैठ जाते हैं । और प्राय: गणित के शलाकाधारियों को भी इनकी लिखी चीजें पढ़नी पड़ जाती हैं । दोष मेरा नहीं है । मैं तो केवल परंपरा का निर्वाह कर रहा हूँ। अपने प्रेमचंद तो यह साबित करने के लिए कि वह अच्छे लेखक बन सकते हैं गणित में फेल हो ही गए थे । मेरे साथ, अलबत्ता, एक नई परंपरा आरंभ हो रही है । पाठकों के साथ धोखाधड़ी जरूर करो, पर लेखकीय ईमानदारी के तकाजे से उन्हें यह भी बता दो कि आपके साथ धोखा हुआ है ।

यह उपन्यास आज से दो दशक पहले लिखा और पीने दो दशक पहले छपा गया था, पर प्रकाशित नहीं हो पाया था । कारण यह नहीं था कि उस समय तक हिंदुस्तान में बिजली नहीं आ पाई थी, (समस्या इतनी सरल होती तो दीये या मशाल में काम चला लिया गया होता) बल्कि यह कि एक मेमने को शेर की तरह छलाँग लगाकर पाठकों पर टूट पड़ने को ललकारा गया था और मेमना बेचारा खुद ही आँखें मूँदकर प्रकाश से जी चुरा रहा था । प्रकाशन के विषय में स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत का ज्ञान और अनुभव कविगुरु मैथिलीशरण गुप्त के काव्य-संसार से जुड़ा हुआ था जिनकी कृतियाँ कवि- कल्पना में आने से पहले ही पाठ्यपुस्तकों में लग जाती थीं और पुस्तक विक्रेताओं के पास भी पहले पैसा फिर किताबवाले न्याय से पहुँचती थीं । इसका प्रभाव पुस्तक के वितरण पर पड़ा । राधाकृष्ण प्रकाशन ने इसे प्रकाशित तो किया परंतु रहस्यमय कारणों से वे इसका महत्त्व नहीं समझ सके । फिर मुझे उनसे इसका प्रकाशनाधिकार सस्ता साहित्य मण्डल को सौंपने की विवशता उत्पन्न हुई । अनेक आलोचकों ने इसे मेरे बहुचर्चित उपन्यास 'अपने-अपने राम' से अधिक अच्छी रचना माना है । उनका आकलन सही है या नहीं इसका पता चलना बाकी है ।

इस गर्मी और खुशी का इजहार इस रूप में भी हुआ है कि इसकी भाषा में अपेक्षित परिवर्तन कर दिए गए हैं ।

Sample Page

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to महाभिषग: Mahabhishag - A Novel Based on The Life of... (Buddhist | Books)

The Life and Times of Gautam Buddha
by Arun K. Tiwari
HARDCOVER (Edition: 2016)
Ocean Books Pvt. Ltd, New Delhi
Item Code: NAQ819
$28.00
Add to Cart
Buy Now
A Story of Gautama Buddha - As Told Through Postage Stamps
by Binod Shrestha
Paperback (Edition: 2018)
Vajra Books, Nepal
Item Code: NAO833
$55.00
Add to Cart
Buy Now
Gautam Buddha
Item Code: NAO295
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Gautama Buddha
by Leela George
Paperback (Edition: 2006)
National Book Trust
Item Code: NAG970
$7.00
Add to Cart
Buy Now
गौतम बुद्ध: Gautama Buddha
Item Code: NZH086
$5.00
Add to Cart
Buy Now
The Heart Sutra (Talks on Prajnaparamita Hridayam Sutra of Gautama the Buddha)
Deal 20% Off
by Osho
Hardcover (Edition: 2012)
Osho Media International
Item Code: NAD747
$32.50$26.00
You save: $6.50 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Heart Sutra: Discourses on the Prajnaparamita Hridayam Sutra of Gautama the Buddha
by OSHO
Hardcover (Edition: 2004)
A Rebel Book
Item Code: IDF386
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Buddha’s Not Smiling (Uncovering Corruption at the Heart of Tibetan Buddhism Today)
Deal 20% Off
Item Code: IHE016
$31.00$24.80
You save: $6.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Best Way To Catch A Snake (A Practical Guide To The Buddha’s Teachings)
Deal 20% Off
Item Code: NAE120
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Buddha – Mimansa (The Buddha Relation to Vedic Religion)
Item Code: NAL058
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I've been happy with prior purchases from this site!
Priya, USA
Thank you. You are providing an excellent and unique service.
Thiru, UK
Thank You very much for this wonderful opportunity for helping people to acquire the spiritual treasures of Hinduism at such an affordable price.
Ramakrishna, Australia
I really LOVE you! Wonderful selections, prices and service. Thank you!
Tina, USA
This is to inform you that the shipment of my order has arrived in perfect condition. The actual shipment took only less than two weeks, which is quite good seen the circumstances. I waited with my response until now since the Buddha statue was a present that I handed over just recently. The Medicine Buddha was meant for a lady who is active in the healing business and the statue was just the right thing for her. I downloaded the respective mantras and chants so that she can work with the benefits of the spiritual meanings of the statue and the mantras. She is really delighted and immediately fell in love with the beautiful statue. I am most grateful to you for having provided this wonderful work of art. We both have a strong relationship with Buddhism and know to appreciate the valuable spiritual power of this way of thinking. So thank you very much again and I am sure that I will come back again.
Bernd, Spain
You have the best selection of Hindu religous art and books and excellent service.i AM THANKFUL FOR BOTH.
Michael, USA
I am very happy with your service, and have now added a web page recommending you for those interested in Vedic astrology books: https://www.learnastrologyfree.com/vedicbooks.htm Many blessings to you.
Hank, USA
As usual I love your merchandise!!!
Anthea, USA
You have a fine selection of books on Hindu and Buddhist philosophy.
Walter, USA
I am so very grateful for the many outstanding and interesting books you have on offer.
Hans-Krishna, Canada
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India